Saturday, August 13, 2016

अब तो मुक्कमल बात भी नही होती उनसे
जिनके हम कभी अज़ीज हुआ करते थे।
वजह क्या थी इसका इल्म नही
पर शायद लगता है अब हमारी जरूरत नही।।

Thursday, August 4, 2016

वो है हमारे हाकिम जो दिल का हाल नही समझते
और एक हम है जो उनके खातिर आँसू बहाए जा रहे है
दिल की रफ़्तार हो गयी है धीमी, फिर भी रुलाये जा रहे है
खता क्या थी जो खफा हो बैठे वो हमसे
और जब मनाऊं है तो बुरा मान जाते है
दिल की गहरायिओं में उतर के देखो तो
आपके नाम के ही कतरे बहाए जा रहे है
आपकी एक मुस्कराहट की तवज्जो है हमे
और आप हमारे अरमानो को दबाये जा रहे हैं
मान भी जाओ मेरे खुदा अब तो
आप ही है एक जो हमे जीने की राह दिखाए जा रहे है