Wednesday, October 31, 2018

तेजपत्ता

तेजपत्ता, प्रायः हर लज़ीज़ भारतीय व्यंजन का हिस्सा होता है जैसे दम आलू, बिरयानी, पुलाव, इत्यादि। खासकर जब छौंक लगाने की बात हो तो इसका इस्तेमाल अतिआवयश्क हो जाता है। जैसे कि इसका नाम है तेजपत्ता, ये खाने को एक अलग ख़ुशबू और स्वाद देता है, इतना ही नही बाकी मसलों के जायके को और बढ़ता है।  पर जब खाने की बारी आती है
सबसे पहले हम उसे ही बाहर निकल के फेक देते है।

ठीक ऐसे ही, कुछ लोग प्रायः सबके जीवन मे आते है, उनके साथ कुछ देर चलते है, बिना कहे हमारी तकलीफ को समझते है और निस्वर्थ हमारी मदद करते है, और फिर चले जाते है, बिना किसी शिकायत के। और हम उनलोगों बड़ी आसानी से भूल भी जाते है। बिल्कुल उस तेजपत्ते की तरह।

मेरे जीवन के उन खास लोगों को सलाम।

Sunday, October 28, 2018

बदनाम  मेरे  प्यार  का  अफसाना  हुआ  है,
दीवाने  भी  कहते  हैं  की  दिवाना  हुआ  है.

रिश्ता  था  तभी  तो  किसी  बेदर्द  ने  तोडा,
अपना  था  तभी  तो  कोई  बेगाना  हुआ  है ...

बादल  की  तरह  आ  कर  बरस  जाइये  एक  दिन ,
दिल  आप  के  होते  हुए  वीराना  हुआ  है.

बजते  हैं  ख्यालों  में  तेरी  याद  के  घुंघरू,
कुछ  दिन  से  मेरा  घर  भी  परीखाना  हुआ  है.

मौसम  ने  बनाया  है  निगाहों  को  शराबी,
जिस  फूल  को  देखूं  वही  पैमाना  हुआ  है ...

अनुपम रंजन

Friday, October 19, 2018

राम भी तुझमे रावण भी तुझमे

तू है राम, अब तीर चला

तू रावण, को बेधने को

दोनों तू तो तू ही है

 अब अक्स कहाँ और शर्त कहाँ

Friday, October 12, 2018

me too

आज ही सुबह सुबह,
मैं अपने कमरे में सो रहा था,
मीठे से सपने में खो रहा था।
पता नही कौन मुझे आवाज दे रहा था,
आँखे खोली और जाके देखा
दरवाजे पे पड़ोस वाली भाभी खड़ी थी,
नाम था जिनका रेखा।
पर ये क्या, उन्होंने me too me too की छेड़ रखी थी तान,
ये सुन मैं हुआ बड़ा परेशान,
एकबारगी तो जैसे मेरी निकल ही गयी थी जान।
सच है, देखता तो हूँ उन्हें तिरछी नज़र से,
पर नियत मेरी आज भी है साफ।
मेरी हालत अब हो चली है खराब
सांसे अटक रही थी, धड़कने बस धड़क रही थी।
उन्हें करके नज़रअंदाज़
चद्दर तान झूठ-मुठ ही वापिस सो गया।
कुछ एक घंटे बाद
लेके हाथों में मोबाइल जानना चाहा आपना हाल
पर हुआ मैं बड़ा हैरान,
 न फेसबुक, न ट्वीटर न व्हाट्सएप्प पे
मेरे नाम से कोई लफड़ा था,
भाभी तो मेरे आँगन में ही चहक रही थी।
और तब आयी मेरी जान में जान ,
जब पता चला मीठू तो है उनके तोते का नाम।
😝😝

Wednesday, September 12, 2018

आख़री मुलाक़ात और आखरी याद


हमेशा की तरह आज भी मै यानी प्रियम और मेरी दोस्त अमिता अपने पसंदीदा रेस्तरां में मिले| पसंदीदा इसलिए की यहाँ के खाने की बात कुछ और थी, हम यहाँ के लच्छा पराठे और शाही पनीर के दीवाने थे, काफी लज़ीज जो थे | और धीमी सी आवाज़ के साथ चलने वाले  मधुर गीत मन को बड़ा सुकून देते है| हमदोनों अक्सर यहाँ आते है, शायद सप्ताह में एक या बार और किनारे वाली टेबल पे घंटो वक़्त बिताते है| बड़ा लगाव हमें इस जगह से, पता नहीं क्यों?
                     आज मै थोड़ा ज़्यादा ही खुश था, अरे क्यों होऊं, अक्सर मै उसे ज़िद कर मिलने बुलाता था और आज उसने ज़ोर देके आने को कहा| और छुपाऊंगा नहीं बिल भी उसने देने की बात की है| लेकिन सच ये भी है मै कभी कभार ही बिल चुकता था, अक्सर वो ही पैसे देती थी, मेरी जेब तो खली रहती है हमेशा |
 मैंने बनावटी गुस्सा बनाते हुए कहा, अभी परसों ही तो मिले थे और मुझे इतना सारा काम था, फिर भी तुमने मुझे ज़बरदस्ती मिलने को क्यों बुलाया?
वो कुछ बोली नहीं, बस अपनी बड़ी -बड़ी आँखों से होठों पे हलकी मुस्कान लिए एकटक मुझे देखे जा रही है |
पता नहीं क्यों अब मुझे ग़ुस्सा रहा है |
मैंने कहा, मै तुमसे कुछ पूछ रहा हूँ, और तुम मुस्कुरा रही हो | मैंने फिर कहा, अभी परसों ही चार घंटे तुम्हारे साथ घूमने के बाद मुझे तुम्हारे मेहंदी लगाने के चक्कर में एक घंटे तक मेहंदी वाले के पास धूप में खड़ा रहना पड़ा था, याद है | और मुझे आज जरूरी काम भी था |
उसने अब कहा, तो मेहंदी का डिज़ाइन भी तुमने ही पसंद किया था, देखो कैसी लग रही है| उसने दोनों हथेलियों को मेरे सामने खोलकर रखा|
उसकी ये प्यारी बातें सुनकर मुझे बड़ा अच्छा लगा, सारा ग़ुस्सा काफूर था और ऐसा लग रहा, जैसे सारा प्यार मै आज ही उसपे उड़ेल कर दूँ |

अभी मै ये सब सोच ही रहा था की, इतने में उसने अपना पर्स खोला और एक सोने की अंगूठी टेबल पर मेरे सामने रख दिया | मै कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उसने हल्की और भारी आवाज़ के साथ कहा, "मेरी कल शाम को सगाई हो गई"|
        इतना सुन मै पूरी तरह शांत पड़ गया और वो मुझे देखती रही| मेरे चेहरे पे अब कोई भाव नहीं थे| हमदोनो बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे, मै चाह के भी अपनी आसुओं को रोक नहीं पा रहा, उसकी आँखें भी डब-डबाई है, लाल हो चुकी है|

         सहसा तभी एक गाने की धुन हमारे कानो तक पंहुची,
"हमको भी है खबर, तुमको भी है पता,
हो रहा, है जुदा दोनों का रास्ता,
 दूर जाके भी, तुम मेरी यादों में रहना,
 कभी अलविदा कहना
कभी अलविदा कहना "|
     इतना सुनने के बाद एकाएक दोनों जोर से है हंस पड़े और एकसाथ कहा पूरा फ़िल्मी मंजर हो गया ये तो, मै शाहरुख़ और तुम रानी| और फिर एक हल्की सी मुस्कान थी दोनों के चेहरे पे, पर आँखें नाम है |
उसने आखिर में कहा मै मेहंदी तुम्हारे पसंद की लगाना चाह रही, इसलिए तुम्हे धुप में खड़ा रहना पड़ा| सॉरी,अब तुम्हे आगे तंग नहीं करुँगी |  इतना कह, उसने मेरे हाथों कोअपने हाथों से पकड़ा और ...  



"अरे कहाँ खोये हो", मेरी पत्नी ने मेरे हाथों को झकझोरते हुए कहा | ये लो मेनू, मुझे तो कुछ समझ ही नहीं रहा क्या आर्डर करूँ ?
तुम्ही देख के मंगवा लो, कुछ अच्छा |

मैंने मेनू कार्ड छोड़ वेटर को देखा, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था, शायद उसने मुझे पहचान तो नहीं लिया? पर कैसे 10 साल हो गए, ख़ैर जो भी हो, मैंने अपने को शांत किया |

मैंने वेटर से कहा, आप एक काम करो लच्छा पराठा और शाही पनीर हो तो उसे ही ले आइये |
वेटर ने हल्के शब्दों में कहा,आज भी वही?

Tuesday, September 4, 2018

असफल प्रेमी का वेलेंटाइन विश्लेषण

आज बाजार में ये प्रतीत हो रहा था जैसे कोई त्यौहार आने वाला है, बाद में जानकारी मिली युवाओं का बहुप्रतीक्षित एक सप्ताह तक चलने वाले त्यौहार की त्यारियां जोर शोर पे है। टेडी बेयर, गिफ्ट्स, कार्ड्स, नए नए तरह के चोक्लेटस से दुकाने अटी पड़ी है। फूलों की दुकाने भी सज गयी है। युवको और युवतियों के हुजूम और गलबहियां चारों तरफ है।

आज अगर वेलेटाइन बाबा इस दुनिया में होते तो देख कर कितने प्रफुल्लित होते। उनके द्वारा शूरू की गयी प्रेम दिखाने या प्रदर्शित करने की प्रथा आज कितनी तेजी से फैली है।

ये अल्फ़ाज़ मेरे नही उन युवकों के है जिन्हें इस वेलेटाइन कुछ हाथ नही आया।

ख़ता

देखा आज उसको अर्सों बाद
दोष मेरा ही नही केवल
आंखें तो उसने भी चुरा ली

तकता रहा उसे यूंही छुप छुपकर
और कोशिश उसने भी की
पर शिकवे ही थे जो भारी पड़ गए

आज छाई है ख़ामोशी हर तरफ
जहां अल्फ़ाज़ों के ताल सज़ा करते थे
अब सन्नाटों का बस घेरा है

ख़ता मुझसे हुई या रही तुम्हारी
नहीं मतलब इन सवालों का
अब तो हमदोनों अज़नबी हो चले 





Sunday, August 5, 2018

दोस्ती और बचपन

पहली दफ़ा स्कूल की चारदीवारी में
घर की याद थी और मन घबराया
सोच ही रहा था क्यों किया माँ ने ऐसा
तभी कई नन्हे हाथों ने हाथ बढ़ाया

शायद ये ही शुरुआत थी, दोस्ती की।

रख कंधों पे हाथ एक दूजे के
निकलते थे जब हम राहों पे
फ़िल्म-तमाशे, खेल-खिलाड़ी और शक्तिमान की बातों में
बीतते रहे दिन, हंसी- ठिठोली, छूपम-छुपाई
खुशी और निश्छल प्रेम के साये में

शायद ये ही मिठास थी दोस्ती की।

नई साईकल की धौंस दिखाना
और बाद में उसपर सबको बिठाना
हमारी गलतियों को टीचर से छुपाना
और टिफ़िन बॉक्स से लंच चुराना

शायद यादें ये कभी भूल न पाएं, दोस्ती की।

क्लास के पहले होमवर्क की कॉपी कराना
और एग्जाम में मंदबुद्धियों को कॉपी दिखाना
झूठ बोलकर सबकी मम्मियों से बचाना
और इन अहसानों का का कर्ज चॉक्लेट से चुकाना।

शायद ये ही अच्छी आदतें थी बचपन के दोस्ती की।


Saturday, August 4, 2018

इल्मे इश्क़

इश्क़ की रवायतों से अनजान नही हम
हम भी कभी इश्के तालिब -इल्मी थे
वफ़ा-ए- इश्क़ अंजाम क्या होता है
वाकिफ हूं जनाब, कहता हूँ ईमान से।

Wednesday, August 1, 2018

अक़ीक़

था इन्तज़ार इस दफ़े भी
कि शायद बद्र के ढलते ही
सुर्ख़ सुब्ह की गर्माहट से
पड़ी बर्फ पिघल ही जाए।

पर ये तो बस एक ख़्वाब ही था
और शायद हो क्यों न
फ़िरदौस की तमन्ना लाजमी है
हर इंसा के लिए।

बेरुखी की इंतहा ये है
हम गैर है और अब अजनबी भी
पर इत्तफ़ाक़ का आलम ये है
हम भी कभी अक़ीक़ हुआ करते थे।



Wednesday, July 18, 2018

इश्क़ ऐसे करो कि, धड़कन में उतर जाए,
सांस भी लें तो खुशबू उसी की आये
प्यार का नशा आँखों पर ऐसा छाए
बात कोई भी हो, जुबां पे नाम उसी का आये।

Saturday, July 14, 2018

तू नही है तो क्या
तेरी परछाई आज भी वन्ही दिखती है
बस तस्सल्ली हो जाती है
शायद तुम आज भी यहीं हो।
एक तो घुप काली रात और ऊपर से ये अँधेरी परछाई,
 हर तरफ सन्नाटा और जाने किधर से कोयल की कुक आयी,
अँधेरे की आगोश में सिमटा है सब कुछ,
और एक हम है जिसे अब तक नींद नही आयी।

Sunday, May 27, 2018

शेर-ओ-शायरी तो दिल बहलाने का जरिया है जनाब,
लफ़्ज़ कागज पर उतारने से महबूब नहीं लौटा करते...!


Tuesday, May 8, 2018

Love u Maa

when u  feel u are alone in crowd
when u think no one can understand you
when u think ur love is rejected by others
and when u hate ur life just close ur eyes..

 and think about her who loves u truly
cares for u in lonelinessdies when you cry
she is no one else
but MOM

maa i love you 

My feelings, urs too ...

Wednesday, May 2, 2018

कभी थे गहरे  दोस्त अब होने वाली है उनमे भयंकर जंग
छुप छुपके साथ देते थे,और कहते थे इस बात में नही कोई दम 
अब सँभालने की बरी उसकी है, जिसने सींचा और फैलाया आतंक
क्योंकि अब, तालिबान ने कहा है अब हमारा पाक दुश्मन नंबर वन

माँ...

धरती  पे  इश्वर  की  तलाश है
मालिक  तेरा  बंद  कितना  निराश  है 
क्यों  खोजता  है  इन्शा इश्वर  को
जबकि  तेरे  दुसरे  रूप  में
माँ  उसके  इतने  पास  है