Sunday, December 27, 2020

मेरी प्रियतम

 तुम कभी किसी बात पे जब रूठ जाती हो

लगता है तू पास होकर भी दूर चली जाती हो।


न रूठ मुझसे मेरी जाँ तू कभी

बिन तेरे मै अधूरा हूँ

तू नही तो कहां मैं पूरा हूँ।

बातें अधूरी तेरे बिन...

रातें कहाँ पूरी होती तेरे बिन...

दिन भी बोझिल से रहता है

जिस्म तो जागता है

पर मन तो बस सोता है।


जैसे चांद बिन चांदनी के अधूरा है

मेरा जीवन भी तेरे बिन कहाँ पूरा है।

मास्क वाली लड़की...

 याद है मुझे, वो सुबह निराली थी,

बोले तो समय कोविड वाली थी 

धड़कनों का था हाल बुरा और मन घबराया

आज उनसे पहली मुलाकात जो होनेवाली थी।


खड़ा सीढ़ियों पे उनकी राह तक रहा था,

और हनुमान चालीसा भी पढ़ रहा था,

कुछ अजीब सी फिलिंग महसूस कर रहा था,

कुछ गड़बड़ न हो, सोच डर रहा था।


दरवाजे पे उसकी गाड़ी आकर लगी थी,

पर ये क्या? लड़की तो मास्क वाली थी।

चेहरा छुपाये, 

शरमाये,

मुझसे नज़रे बचाये,

भीतर-भीतर मुझे खड़ूस बताये,

शायद अंदर ही अंदर देख मुझे चिड़चिड़ाये

और मुझसे मिलने को आये।

देख उसको मैं ठिठक गया,

दिल भी जाके उसी पे अटक गया

Blah blah blah....

मैं जाने कितनी बातें कह गया।

ये तो मेरे दिल का हाल था,

पर उसकी क्या - न जान पाया,

अनजान थे एकदूजे से हम,

शायद उसके मन था डर समाया

कैसा होगा वो समझ न था आया

फिर भी न जाने क्यूं, उसने बस हाँ में सर हिलाया।


आज का हाल ये है साहिब,

वो बिन मेरे अधूरी है,

मैं कहाँ उस बिन पूरा हूँ,

वो मेरी संगिनी और मैं उसका दिल का हीरा हूं।