Wednesday, November 16, 2016

My firstever writing

कहते है लोग इश्क़ में दीवाने हो जाते है
मैंने तो मोहब्बत न क़ि
फिर शायर क्यों हो गया

Thursday, October 20, 2016

रातों को सोता हूँ तो नींद नही आती है
और दिन जम्हाइयों में गुजर जाती है ।

खाने को जाता हूँ तो भूख चली जाती है
और खली बैठा हूँ तो भूख बहुत सताती है ।

भीड़ मे बैठा तो सन्नाटे की खवाहिश होती है
और अकेला राहूँ  तो तन्हाई काट खाती है ।

जब न हो कोई लाइफ में तो, उनकी खवाहिश होती है
और जब आ जाये जिन्दगी जहन्नुम बन जाती है ।

ये ही इनसान की फितरत है ...

Friday, September 23, 2016

kaun hai Hindu, kaun hai muslim
 pahle hum Bhart ke bande hai;
kya hai mandir kya hai masjid
sab ek hi int se bante hai;
kuch mane ram kuch kahe rahim
par mansha -shanti, sabki ek hi hai;
jhagde ghar-ghar hote hai
phir bhi parivar sab ek hi hai.

Tuesday, September 6, 2016

सीधे रस्ते भी नही होते है आसान
जब दूर देखो तो दीखता धुंधला आसमान
टेढ़े मेढ़े रास्तों की अलग  ही है कहानी
बात पत्ते की बस ये है भाई
गर चले उसपर तो हर रह है आसान ।

Saturday, August 13, 2016

अब तो मुक्कमल बात भी नही होती उनसे
जिनके हम कभी अज़ीज हुआ करते थे।
वजह क्या थी इसका इल्म नही
पर शायद लगता है अब हमारी जरूरत नही।।

Thursday, August 4, 2016

वो है हमारे हाकिम जो दिल का हाल नही समझते
और एक हम है जो उनके खातिर आँसू बहाए जा रहे है
दिल की रफ़्तार हो गयी है धीमी, फिर भी रुलाये जा रहे है
खता क्या थी जो खफा हो बैठे वो हमसे
और जब मनाऊं है तो बुरा मान जाते है
दिल की गहरायिओं में उतर के देखो तो
आपके नाम के ही कतरे बहाए जा रहे है
आपकी एक मुस्कराहट की तवज्जो है हमे
और आप हमारे अरमानो को दबाये जा रहे हैं
मान भी जाओ मेरे खुदा अब तो
आप ही है एक जो हमे जीने की राह दिखाए जा रहे है 

Sunday, June 26, 2016

आज उन्हें हमारी एक गलती नागवार गुजरी
और वो भूल गए
हमने उनकी हर बेवफाई को माफ़ किया

Monday, June 6, 2016

पिरो लो खाव्हिशों को धागों से,
ताकि वो हक़ीक़त बन जाए
कुछ देर ही सही खाव्हिशें जिन्दा तो रहेंगी

Thursday, June 2, 2016

गर हो जए मुहब्बत ये दोस्त
तो कहते है हम इश्क़ के विद्वान है
और मिली जब बेवफाई उन्हें ये अमितेश
तो केहते है आखिर ये किस चिड़िया का नाम हैं
Gud nyt kehne ka unka andaj itna bhaya ke
Subh ratri kehte kehte raat hi bit gayi...

Ishq ki rahoon se gujar chuka hoon mai
kafir nhi mai ye dost
bas thoda sudhar chuka hoon mai


sudhrne ki kawayat kise thi mohabbat me, jo humne na samjha to nikal liye...


Gar ishq k daldal se nikalna hota itna asan, to hir ranjha ne muft me apni jan na gawai hoti

Sunday, May 8, 2016

Maa

when u  feel u are alone in crowd
when u think no one can understand you
when u think ur love is rejected by others
and when u hate ur life just close ur eyes..

 and think about her who loves u truly
cares for u in loneliness dies when you cry
she is no one else
but MOM

maa i love you

Saturday, May 7, 2016

कान्हा की राधा

कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा
दोनों का  रिश्ता जग से अंजना
नन्द के दुलारे बड़े ही सयाने थे
गईयाँ चरते थे
बंसरी बजाते थे
गोपियों को रिझाते थे
राधा बेचारी थी
कुछ कह ना पति थी
श्याम तो सताता था
पर वो तो मुस्काती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...
राधा की  ये  कहानी  थी
कृष्ण की दीवानी थी
वो तो शरमाती थी
कुछ कह न पाती  थी
पर ख़ुशी भी चिप न पाती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...

Wednesday, May 4, 2016

न मै नाराज़ किसी से

न मै नाराज़ किसी से
न किसी से शिकायत है
ये तो वक्त ही है
और एहमियत आपकी
कुछ रिश्ते और मजबूत हुए
और कुछ में गांठ पड़ी
कभी वो दूर होके भी पास थी
आज पास होके भी दुरी दिखती है

ये दरिया है वक़्त का
बहती ही रहती है
कुछ धाराओँ को अपना लेते हैं
और कुछ किनारो को
यहाँ लहरें उठती ही नही
सब खामोश है
न मै नाराज़ किसी से
न किसी से शिकायत है

अरसों बाद मेरी एक रचना...

Tuesday, March 1, 2016

Facebook की दास्तान

एक  दुखभरी  सच्ची  दस्तान  जो  आपके  आँखों  में  आंसू ला देंगे

facebook की लत से हुआ ये नुकसान
सुनता हूँ मै अपनी दुःख भरी दस्तान |

हुआ यूँ की मेरे GPRS A/C में 5 MB ही बचा था ,
और  लेना facebook का भी मज़ा था|
लत तो पुरानी थी
और जाननी हर दोस्त की कहानी थी
बैठ गया नेट करके कनेक्ट
और करने लगा फटाफट कमेन्ट
याद न रहा बैलेंस का हाल
और देखते ही देखते DOCOMO हो गया मालामाल|
देखा बैलेंस तो ना आया रास
क्योंकि रुपये 90 बन गए पैसे पचास|

Monday, February 8, 2016

प्रपोज DAY

करना था उन्हें प्रपोज
हाथ में लिया एक प्यरा सा रोज़
लिया मन में आशंकाएं
कहीं एक थप्पड़ ना पड़ जाए
मांगता चला ऊपर वाले से दुईएँ
हे प्रभु आज दिन अच्छा जाये
चल पड़ा उनके रास्ते
शायद कहीं मुलाकात हो जाये
देखो भगवान की क्या मर्जी थी
उसकी आँख, पहले से किसी और से लड़ी थी
हुआ मेरा दिल चुर चुर और मै गुर्राया
मेरे हाथों का फूल भी मुरझाया
सोचा अब करना है क्या
दिल ने तुरंत ही भेज उत्तर
इंतजार कर आगले प्रपोज डे का पुत्तर