वो भी एक ज़माना था जब दो बात कम हो तो मुंह फेर लेती थी,
और एक आज का वक़्त है जब चाह है दो लफ्ज़ कह सकूँ उन्हें तो भी मुंह फेर लेती है |
और एक आज का वक़्त है जब चाह है दो लफ्ज़ कह सकूँ उन्हें तो भी मुंह फेर लेती है |
कुछ लफ्ज़, कुछ अल्फाज़, कुछ बातें, कुछ यादें, कुछ कविता, कुछ नज़्म, आपके लिए पढ़े और बताएं कैसे थे...