कुछ लफ्ज़, कुछ अल्फाज़, कुछ बातें, कुछ यादें, कुछ कविता, कुछ नज़्म, आपके लिए पढ़े और बताएं कैसे थे...
Wednesday, November 8, 2017
Saturday, November 4, 2017
Sunday, October 15, 2017
तेरी याद ....
वो याद कहाँ से लाऊंगा
वो बात कहां से लाऊँगा
संग तेरे जो बीती थी,
गर तू रूठी रही बस यूं
वो सारे जज़्बात कहाँ से लाऊँगा।
वो प्यारे प्यारे ख़्वाब तेरे
वो सजते से अरमान मेरे
जो साथ संजोये हमने थे
बिन तेरे कभी न पूरी होगी
कहीं रह न जाये बस यूँही अधूरे।
तेरा भी ये कहना था
और मैंने भी ये माना था
कुछ बात रही हमदोनो में
जो साथ यहां तक आये हैं
छोड़ो कुछ बातों को और दूर तलक निकलते है।
वो बात कहां से लाऊँगा
संग तेरे जो बीती थी,
गर तू रूठी रही बस यूं
वो सारे जज़्बात कहाँ से लाऊँगा।
वो प्यारे प्यारे ख़्वाब तेरे
वो सजते से अरमान मेरे
जो साथ संजोये हमने थे
बिन तेरे कभी न पूरी होगी
कहीं रह न जाये बस यूँही अधूरे।
तेरा भी ये कहना था
और मैंने भी ये माना था
कुछ बात रही हमदोनो में
जो साथ यहां तक आये हैं
छोड़ो कुछ बातों को और दूर तलक निकलते है।
Monday, August 21, 2017
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