Sunday, January 6, 2019

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

धुन्ध की चादरें का साया था,
अब धूप की गर्माहट छा रही है।
हरे थे जो सरसों के खेत चहुं ओर
अब पीली सी गहरी परत मुस्कुरा रही है।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

पड़ी है जो नफरत की गर्द चादर दिल पर,
मिटाओ उसे कर बातें मिलकर।
रही होगी कुछ गलतियां तुम्हारी भी,
मानो उसे और बढ़ो आगे साथ चलकर।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

Wednesday, October 31, 2018

तेजपत्ता

तेजपत्ता, प्रायः हर लज़ीज़ भारतीय व्यंजन का हिस्सा होता है जैसे दम आलू, बिरयानी, पुलाव, इत्यादि। खासकर जब छौंक लगाने की बात हो तो इसका इस्तेमाल अतिआवयश्क हो जाता है। जैसे कि इसका नाम है तेजपत्ता, ये खाने को एक अलग ख़ुशबू और स्वाद देता है, इतना ही नही बाकी मसलों के जायके को और बढ़ता है।  पर जब खाने की बारी आती है
सबसे पहले हम उसे ही बाहर निकल के फेक देते है।

ठीक ऐसे ही, कुछ लोग प्रायः सबके जीवन मे आते है, उनके साथ कुछ देर चलते है, बिना कहे हमारी तकलीफ को समझते है और निस्वर्थ हमारी मदद करते है, और फिर चले जाते है, बिना किसी शिकायत के। और हम उनलोगों बड़ी आसानी से भूल भी जाते है। बिल्कुल उस तेजपत्ते की तरह।

मेरे जीवन के उन खास लोगों को सलाम।