Thursday, October 20, 2016

रातों को सोता हूँ तो नींद नही आती है
और दिन जम्हाइयों में गुजर जाती है ।

खाने को जाता हूँ तो भूख चली जाती है
और खली बैठा हूँ तो भूख बहुत सताती है ।

भीड़ मे बैठा तो सन्नाटे की खवाहिश होती है
और अकेला राहूँ  तो तन्हाई काट खाती है ।

जब न हो कोई लाइफ में तो, उनकी खवाहिश होती है
और जब आ जाये जिन्दगी जहन्नुम बन जाती है ।

ये ही इनसान की फितरत है ...

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