मै तन्हा पुकारता रहा
वो भी तनहा सुनती रही।
उसे शायद इल्म न था
क्या हूँ मै उसके खातिर?
या फिर कुछ मजबूरी थी।
कहती थी की तुम अपने हो
फिर भी मेरा जिक्र न था|
वो भी तनहा सुनती रही।
उसे शायद इल्म न था
क्या हूँ मै उसके खातिर?
या फिर कुछ मजबूरी थी।
कहती थी की तुम अपने हो
फिर भी मेरा जिक्र न था|
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