एक तो घुप काली रात और ऊपर से ये अँधेरी परछाई,
हर तरफ सन्नाटा और जाने किधर से कोयल की कुक आयी,
अँधेरे की आगोश में सिमटा है सब कुछ,
और एक हम है जिसे अब तक नींद नही आयी।
हर तरफ सन्नाटा और जाने किधर से कोयल की कुक आयी,
अँधेरे की आगोश में सिमटा है सब कुछ,
और एक हम है जिसे अब तक नींद नही आयी।
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