Tuesday, September 4, 2018

ख़ता

देखा आज उसको अर्सों बाद
दोष मेरा ही नही केवल
आंखें तो उसने भी चुरा ली

तकता रहा उसे यूंही छुप छुपकर
और कोशिश उसने भी की
पर शिकवे ही थे जो भारी पड़ गए

आज छाई है ख़ामोशी हर तरफ
जहां अल्फ़ाज़ों के ताल सज़ा करते थे
अब सन्नाटों का बस घेरा है

ख़ता मुझसे हुई या रही तुम्हारी
नहीं मतलब इन सवालों का
अब तो हमदोनों अज़नबी हो चले 





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