Saturday, October 12, 2019

क्यूं...

पता नही, क्यूं
आज भी, शिद्दत से
ये दिल तुम्ही को चाहता है।

मै हूँ, तेरी यादें है
एक तस्वीर भी है तेरी,
अलमारी में संजो रखा है।

और वो तुम्हारा पहला ख़त
जिसमे एहसास है तेरे
आज भी रखा है संभाल कर।

पता नही, क्यूं
आज भी, शिद्दत से
ये दिल तुम्ही को चाहता है।

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