Sunday, December 27, 2020

मेरी प्रियतम

 तुम कभी किसी बात पे जब रूठ जाती हो

लगता है तू पास होकर भी दूर चली जाती हो।


न रूठ मुझसे मेरी जाँ तू कभी

बिन तेरे मै अधूरा हूँ

तू नही तो कहां मैं पूरा हूँ।

बातें अधूरी तेरे बिन...

रातें कहाँ पूरी होती तेरे बिन...

दिन भी बोझिल से रहता है

जिस्म तो जागता है

पर मन तो बस सोता है।


जैसे चांद बिन चांदनी के अधूरा है

मेरा जीवन भी तेरे बिन कहाँ पूरा है।

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