तुम कभी किसी बात पे जब रूठ जाती हो
लगता है तू पास होकर भी दूर चली जाती हो।
न रूठ मुझसे मेरी जाँ तू कभी
बिन तेरे मै अधूरा हूँ
तू नही तो कहां मैं पूरा हूँ।
बातें अधूरी तेरे बिन...
रातें कहाँ पूरी होती तेरे बिन...
दिन भी बोझिल से रहता है
जिस्म तो जागता है
पर मन तो बस सोता है।
जैसे चांद बिन चांदनी के अधूरा है
मेरा जीवन भी तेरे बिन कहाँ पूरा है।
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