कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा
दोनों का रिश्ता जग से अंजना
नन्द के दुलारे बड़े ही सयाने थे
गईयाँ चरते थे
बंसरी बजाते थे
गोपियों को रिझाते थे
राधा बेचारी थी
कुछ कह ना पति थी
श्याम तो सताता था
पर वो तो मुस्काती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...
राधा की ये कहानी थी
कृष्ण की दीवानी थी
वो तो शरमाती थी
कुछ कह न पाती थी
पर ख़ुशी भी चिप न पाती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...
और राधा का कान्हा
दोनों का रिश्ता जग से अंजना
नन्द के दुलारे बड़े ही सयाने थे
गईयाँ चरते थे
बंसरी बजाते थे
गोपियों को रिझाते थे
राधा बेचारी थी
कुछ कह ना पति थी
श्याम तो सताता था
पर वो तो मुस्काती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...
राधा की ये कहानी थी
कृष्ण की दीवानी थी
वो तो शरमाती थी
कुछ कह न पाती थी
पर ख़ुशी भी चिप न पाती थी
कान्हा की राधा
और राधा का कान्हा ...