रात के अंधेरे में
मद्धिम सी रौशनी
कंप्यूटर पे चलते हाथ
हरी बतियाँ
जलती और बुझती
कुछ बीते समय को बताती
फेसबुक की ये गलियां
कुछ नए लोगों से मिलाती
कुछ पुराने दोस्तों से मिलवाती
कुछ नए रिश्ते बनवाती
कुछ पुराने रिश्तों को और मजबूत बनाती
कुछ नए राह दिखाती
कहीं रिश्तों में गरमाहट लाती
कहीं रिश्तों में कड़वाहट भी जागती
फेसबुक की ये गलियां। …
मद्धिम सी रौशनी
कंप्यूटर पे चलते हाथ
हरी बतियाँ
जलती और बुझती
कुछ बीते समय को बताती
फेसबुक की ये गलियां
कुछ नए लोगों से मिलाती
कुछ पुराने दोस्तों से मिलवाती
कुछ नए रिश्ते बनवाती
कुछ पुराने रिश्तों को और मजबूत बनाती
कुछ नए राह दिखाती
कहीं रिश्तों में गरमाहट लाती
कहीं रिश्तों में कड़वाहट भी जागती
फेसबुक की ये गलियां। …