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Friday, May 27, 2011

बचपन की यादें

बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
दादी नानी की कहानियां
और बगीचे में शैतानियाँ
रूठ जाओ तो मिलता माँ का प्यार
और चाचा चाची का दुलार
वो कन्चे की गोलियां
और दोस्तों की टोलियाँ
न खाने की चिंता
न जिन्दगी से गम
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
बहुत याद आते है वो पल
जो लौट के कभी न आयेंगें कल
वो नदियों - तालाबों में कूद- कूद कर नहाना
आज भी याद है माली चाचा के बगीचे से आम चुराना
और फिर बाबूजी की प्यारी डांट फटकार
हमे दिखाती सही रास्ता हरबार
पर क्या करें ये हादसा होता लगातार
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
नींद न आने पे माँ की थपकियाँ
और स्कूल में आँखों में झपकियाँ
हर खेल में दोस्तों का साथ
न हमे था जितना था
न देनी थी किसी को मात
हमे तो चाहिए थी दुनिया की हर ख़ुशी
और बस अपनों का साथ
शायद वो दिन लौट ना पाएंगे
फिर भी हम यही गायेंगे
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है