ऊंचा है और मजबूत भी, जमीं ने रखा है यूँ जकड
हिल भी नही पा रहा
चमकीला है बहुत दमकना उसका काम
पर बादलों के आगे खिल नही पा रहा
होने लगी है सुगबुगाहट
आने वाली है नयी आहट
रोकेगी कब तक ये दुनिया छोड़ के सारी मजबूरियां
तोड़ो इन जंजीरों को
निकलने दो अन्दर के हीरे को
क्योंकि चिड़ियों के पर जब खुलते है
आसमां में नया रंग भरते है
होता है जहाँ में नया सवेरा
रात जाती है, जाता है अँधेरा
ऊठो आगे बढ़ो अन्दर की आवाज़ सुनकर
अब कोई रोक सकता नही तुम्हे
करो अपने सपनो को साकार
तभी मिलेगा जीवन को सही आकार