बहुत दिनों बाद आज देखी सुबह की पहली किरण कितनी सुन्दर, कितनी निर्मल । वो कोयल की कूंक और चिड़ियों की कल कल सितारें पद रहे है धुंधले, और अँधेरा छंट रहा पल पल।
मंद मंद चल रही ठंढी हवाएं, जिसमे फूलों की भीनी सी खुशबू है समाएं , मनो जग रही हो नयी आशायें ।
चाँद अब पद चूका मद्धिम सूरज की लालिमा बढ़ रही हरपल, मोती सी ओंस बिखरी हरी घास पे रात जाने लगी और दिन आया पुरे शबाब पे ।
आज की तेज जिन्दगी का है ये हाल, न पता चलता कब हुआ सवेरा और न ही दीखता कब घिरा अंधेरा ऐसी सुन्दर और मोहक सुबह ने, मन के अन्दर तारों को उकेरा, प्राण किया अब मैंने भी रोज देखूंगा ये सवेरा ।
लोगों के सवाल से और कईयों के जवाब से मन एक शंका भरमाई ढूढने बैठ गया मई आज जीवन की गहराई । क्या है ये जिन्दगी ? उलझो सवाल है जिंदगी ढूंढ़ सको तो जवाब है जिन्दगी पढो तो कताब है जिन्दगी खुल के जियो तो कमाल है जिन्दगी ।
खुशियों का समन्दर है जिन्दगी और दुखों का अम्बार भी है जिन्दगी आगे बढ़ते रहे तो जीत है जिन्दगी गर रुके तो हार भी है जिन्दगी ।
ये जीवन मिलता हमे सिर्फ एक बार मनो इश्वर का उपकार यंही मिलते हमे रिश्ते नाते और दोस्तों का साथ और सबसे ऊपर माँ बाप का प्यार ।
ये जीवन बहुत सिखाती है हर कदम एक नै रह दिखाती है और गर मिल के चले साथ साथ तो जिन्दगी कमल बन जाती है ।