Monday, November 13, 2017

मै तन्हा पुकारता रहा
वो भी तनहा सुनती रही।
उसे शायद इल्म न था
क्या हूँ मै उसके खातिर?
या फिर कुछ मजबूरी थी।
कहती थी की तुम अपने हो
फिर भी मेरा जिक्र न था|

Saturday, November 4, 2017

वो भी एक ज़माना था जब दो बात कम हो तो मुंह फेर लेती थी,
और एक आज का वक़्त है जब चाह है दो लफ्ज़ कह सकूँ उन्हें तो भी मुंह फेर लेती है |

Sunday, October 15, 2017

तेरी याद ....

वो याद कहाँ से लाऊंगा
वो बात कहां से लाऊँगा
संग तेरे जो बीती थी,
गर तू रूठी रही बस यूं
वो सारे जज़्बात कहाँ से लाऊँगा।

वो प्यारे प्यारे ख़्वाब तेरे
वो सजते से अरमान मेरे
जो साथ संजोये हमने थे
बिन तेरे कभी न पूरी होगी
कहीं रह न जाये बस यूँही अधूरे।

तेरा भी ये कहना था
और मैंने भी ये माना था
कुछ बात रही हमदोनो में
जो साथ यहां तक आये हैं
छोड़ो कुछ बातों को और दूर तलक निकलते है।

Monday, August 21, 2017

ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर
रखना थोड़ा भरोसा आप हमपर
हम निभाएंगे दोस्ती का रिश्ता इस कदर
की भूलने पर भी न भुला पाओगे हमें ज़िन्दगी भर।