हमेशा की तरह
आज भी मै
यानी प्रियम और
मेरी दोस्त अमिता
अपने पसंदीदा रेस्तरां
में मिले| पसंदीदा
इसलिए की यहाँ
के खाने की
बात कुछ और
थी, हम यहाँ
के लच्छा पराठे
और शाही पनीर
के दीवाने थे,
काफी लज़ीज जो
थे | और धीमी
सी आवाज़ के
साथ चलने वाले
मधुर
गीत मन को
बड़ा सुकून देते
है| हमदोनों अक्सर
यहाँ आते है,
शायद सप्ताह में
एक या २
बार और किनारे
वाली टेबल पे
घंटो वक़्त बिताते
है| बड़ा लगाव
हमें इस जगह
से, पता नहीं
क्यों?
आज मै
थोड़ा ज़्यादा ही
खुश था, अरे
क्यों न होऊं,
अक्सर मै उसे
ज़िद कर मिलने
बुलाता था और
आज उसने ज़ोर
देके आने को
कहा| और छुपाऊंगा
नहीं बिल भी
उसने देने की
बात की है|
लेकिन सच ये
भी है मै
कभी कभार ही
बिल चुकता था,
अक्सर वो ही
पैसे देती थी,
मेरी जेब तो
खली रहती है
हमेशा |
मैंने बनावटी
गुस्सा बनाते हुए कहा,
अभी परसों ही
तो मिले थे
और मुझे इतना
सारा काम था,
फिर भी तुमने
मुझे ज़बरदस्ती मिलने
को क्यों बुलाया?
वो कुछ बोली
नहीं, बस अपनी
बड़ी -बड़ी आँखों
से होठों पे
हलकी मुस्कान लिए
एकटक मुझे देखे
जा रही है
|
पता नहीं क्यों
अब मुझे ग़ुस्सा
आ रहा है
|
मैंने कहा, मै
तुमसे कुछ पूछ
रहा हूँ, और
तुम मुस्कुरा रही
हो | मैंने फिर
कहा, अभी परसों
ही चार घंटे
तुम्हारे साथ घूमने
के बाद मुझे
तुम्हारे मेहंदी लगाने के
चक्कर में एक
घंटे तक मेहंदी
वाले के पास
धूप में खड़ा
रहना पड़ा था,
याद है न
| और मुझे आज
जरूरी काम भी
था |
उसने अब कहा,
तो मेहंदी का
डिज़ाइन भी तुमने
ही पसंद किया
था, देखो कैसी
लग रही है|
उसने दोनों हथेलियों
को मेरे सामने
खोलकर रखा|
उसकी ये प्यारी
बातें सुनकर मुझे
बड़ा अच्छा लगा,
सारा ग़ुस्सा काफूर
था और ऐसा
लग रहा, जैसे
सारा प्यार मै
आज ही उसपे उड़ेल कर दूँ
|
अभी मै ये
सब सोच ही
रहा था की,
इतने में उसने
अपना पर्स खोला
और एक सोने की
अंगूठी टेबल पर
मेरे सामने रख
दिया | मै कुछ
समझ पाता, उससे
पहले ही उसने
हल्की और भारी
आवाज़ के साथ
कहा, "मेरी कल
शाम को सगाई
हो गई"|
इतना सुन मै
पूरी तरह शांत
पड़ गया और
वो मुझे देखती
रही| मेरे चेहरे
पे अब कोई
भाव नहीं थे|
हमदोनो बस एक
दूसरे को देखे
जा रहे थे,
मै चाह के
भी अपनी आसुओं
को रोक नहीं
पा रहा, उसकी
आँखें भी डब-डबाई
है, लाल हो
चुकी है|
सहसा तभी
एक गाने की
धुन हमारे कानो
तक पंहुची,
"हमको
भी है खबर,
तुमको भी है
पता,
हो रहा, है
जुदा दोनों का
रास्ता,
दूर जाके
भी, तुम मेरी
यादों में रहना,
कभी अलविदा
न कहना
कभी अलविदा न कहना
"|
इतना सुनने
के बाद एकाएक
दोनों जोर से
है हंस पड़े
और एकसाथ कहा
पूरा फ़िल्मी मंजर
हो गया ये
तो, मै शाहरुख़
और तुम रानी|
और फिर एक
हल्की सी मुस्कान
थी दोनों के
चेहरे पे, पर
आँखें नाम है
|
उसने आखिर में कहा मै मेहंदी तुम्हारे पसंद की लगाना चाह रही, इसलिए तुम्हे धुप में खड़ा रहना पड़ा| सॉरी,अब तुम्हे आगे तंग नहीं करुँगी | इतना कह, उसने मेरे हाथों कोअपने हाथों से पकड़ा और ...
उसने आखिर में कहा मै मेहंदी तुम्हारे पसंद की लगाना चाह रही, इसलिए तुम्हे धुप में खड़ा रहना पड़ा| सॉरी,अब तुम्हे आगे तंग नहीं करुँगी | इतना कह, उसने मेरे हाथों कोअपने हाथों से पकड़ा और ...
"अरे कहाँ खोये
हो", मेरी पत्नी
ने मेरे हाथों
को झकझोरते हुए
कहा | ये लो
मेनू, मुझे तो
कुछ समझ ही
नहीं आ रहा
क्या आर्डर करूँ
?
तुम्ही देख के
मंगवा लो, कुछ
अच्छा |
मैंने मेनू कार्ड
छोड़ वेटर को
देखा, वो मुझे
देख कर मुस्कुरा
रहा था, शायद
उसने मुझे पहचान
तो नहीं लिया?
पर कैसे 10 साल
हो गए, ख़ैर
जो भी हो,
मैंने अपने को
शांत किया |
मैंने वेटर से
कहा, आप एक
काम करो लच्छा
पराठा और शाही
पनीर हो तो
उसे ही ले
आइये |
वेटर ने हल्के
शब्दों में कहा,आज भी
वही?