Saturday, October 12, 2019

क्यूं...

पता नही, क्यूं
आज भी, शिद्दत से
ये दिल तुम्ही को चाहता है।

मै हूँ, तेरी यादें है
एक तस्वीर भी है तेरी,
अलमारी में संजो रखा है।

और वो तुम्हारा पहला ख़त
जिसमे एहसास है तेरे
आज भी रखा है संभाल कर।

पता नही, क्यूं
आज भी, शिद्दत से
ये दिल तुम्ही को चाहता है।

Friday, September 13, 2019

इश्क़-एक लंबा सफर

ये जो इश्क़ है
इक लंबा सफर है
चलो कुछ अल्फ़ाज़ रहने दो।

बातें करेंगे एक दूजे की
धीमे धीमे, आहिस्ता आहिस्ता
रस्ते को बस यूंही चलने दो।

कुछ तुम अपनी कहो
कुछ मेरी सुनो, जल्दी किसे है
खामोशियों को भी कुछ जगह रहने दो।

ये जो इश्क़ है
इक लंबा सफर है
चलो कुछ अल्फ़ाज़ रहने दो।

Contd...

Sunday, January 6, 2019

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

धुन्ध की चादरें का साया था,
अब धूप की गर्माहट छा रही है।
हरे थे जो सरसों के खेत चहुं ओर
अब पीली सी गहरी परत मुस्कुरा रही है।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।

पड़ी है जो नफरत की गर्द चादर दिल पर,
मिटाओ उसे कर बातें मिलकर।
रही होगी कुछ गलतियां तुम्हारी भी,
मानो उसे और बढ़ो आगे साथ चलकर।

बीता दिसम्बर जनवरी जा रही है।