तुझे पाके यूँ कभी खो दिया ,
कभी लफ़्ज़ों में यूँ पिरो दिया ...
कभी साँस साँस में जिया तुझे,
कभी यादों में तेरी रो दिया ...
कभी लिख के तुझको पढ लिया,
कभी खवाब सा तुझे गढ़ लिया ...
कभी थम गया सुनकर तुझे,
कभी कारवां सा बढ गया ...
कभी रशमो - रिवाज़ सा जानकार ,
कभी देवता तुझे मानकर,
तेरे खवाब से मेरी रूह को,
मैंने बूंद बूंद भिगो दिया ...
तुझे पाके यूँ कभी खो दिया,
कभी लफ़्ज़ों में यूँ पिरो दिया ...
कभी साँस साँस में जिया तुझे
कभी यादों में तेरी रो दिया ....
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