मत करो किसी से इतनी मुहब्बत कि
टूटे तो आह भी निकल न सके
दर्द हो सीने में इस कदर की
सांस भी सलीके से न चल सके
पलकों का झरने रुक से जाते हैं
आँखों की झील जो सुख जाते हैं
रास्ते बहुत ही बोझिल हो चले है
चंद कदम भी अब मीलों, लगने लगे है
तसव्वुर हमारा उन्हें गंवारा नही
लगता है अब हम उन्हें प्यारे नही
टूटे तो आह भी निकल न सके
दर्द हो सीने में इस कदर की
सांस भी सलीके से न चल सके
पलकों का झरने रुक से जाते हैं
आँखों की झील जो सुख जाते हैं
रास्ते बहुत ही बोझिल हो चले है
चंद कदम भी अब मीलों, लगने लगे है
तसव्वुर हमारा उन्हें गंवारा नही
लगता है अब हम उन्हें प्यारे नही
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