Sunday, December 31, 2017

लो फिर बिता एक साल...

लो फिर बिता एक साल...

कुछ बातें, कुछ यादें,
कुछ लम्हे, कुछ जज़्बात,
कुछ सपने, कुछ शिकायतें,
कुछ हुए पूरे, कुछ रहे अधूरे।

किसी को प्यार दिया, कहीं से प्यार मिला,
किसी को मना लिया, कोई रूठा ही रहा,
कहीं नजदीकियां बढ़ी, तो कहीं फासला,
कुछ रिश्ते हुए कमजोर, कहीं गरमाहट रही।

कुछ वादे हुए पूरे, कुछ रहे अधूरे,
कुछ खाव्हिशें हुए सच, कुछ सपने ही रहे,
कुछ मंजिले हासिल हुई, कुछके रास्ते,
कहीं जीत मिली, कुछ हार के दीदार हुए।

किसी ने भरोसा तोड़ा, किसी ने उम्मीद बढाई,
कहीं आशाओं पे पानी फिर, कही नई किरण दिखी,
कहीं खुशी मिली, किसी ने गम भी दिया,
कहीं मुस्कुराहट दिखी, कहीं कड़वाहट।

समय निरंतर चलता रहा,
भावनाएं बदलती रही,
लोग मिलते रहे,
अनुभव होता गया,
जो मिला खुश रहा।

लो फिर बिता एक साल...

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