देखा आज उसको अर्सों बाद
दोष मेरा ही नही केवल
आंखें तो उसने भी चुरा ली
तकता रहा उसे यूंही छुप छुपकर
और कोशिश उसने भी की
पर शिकवे ही थे जो भारी पड़ गए
आज छाई है ख़ामोशी हर तरफ
जहां अल्फ़ाज़ों के ताल सज़ा करते थे
अब सन्नाटों का बस घेरा है
ख़ता मुझसे हुई या रही तुम्हारी
नहीं मतलब इन सवालों का
अब तो हमदोनों अज़नबी हो चले
ख़ता मुझसे हुई या रही तुम्हारी
नहीं मतलब इन सवालों का
अब तो हमदोनों अज़नबी हो चले