Thursday, February 9, 2012

INDIA AGAINST CORRUPTION


सन १९४७ के बाद पुनः आने वाला है नया सवेरा
क्योंकि जाग चुका है देश ये मेरा
जैसे गांघी ने सोये लोगों के
जज्ज्बातों को उकेरा
हुई नयी क्रांति और आजाद हुआ देश हमारा

आज देश में है भ्रस्टाचार का बोलबाला
कहीं 2G कहीं CWG तो कहीं आदर्श घोटाला
शुरु हुआ है एक नया खेल
नाम जिसका लोकपाल बिल
जनता की आँखों पर बंधी पट्टी हटाई
और भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई
बैठ गए वो अनशन पे
सरकार हिली उनके जन्शाम्र्थान से
आज बन गए हैं जनमानस के आँखों के तारे
है आज के गाँधी, अन्ना हजारे हमारे

भ्रस्टाचार के खिलाफ आगे आओ
भ्रस्ताचारियों को हटाओ
जन लोकपल बिल लाओ
साफ़ सुथरी सरकार बनाओ
भ्रस्टाचार हटाओ
भारत बचाओ देश बचाओ

Tuesday, September 6, 2011

NAYI UDAN


ऊंचा है और मजबूत भी, जमीं ने रखा है यूँ जकड
हिल भी नही पा रहा
चमकीला है बहुत दमकना उसका काम
पर बादलों के आगे खिल नही पा रहा
होने लगी है सुगबुगाहट
आने वाली है नयी आहट
रोकेगी कब तक ये दुनिया छोड़ के सारी मजबूरियां
तोड़ो इन जंजीरों को
निकलने दो अन्दर के हीरे को
क्योंकि चिड़ियों के पर जब खुलते है
आसमां में नया रंग भरते है
होता है जहाँ में नया सवेरा
रात जाती है, जाता है अँधेरा
ऊठो आगे बढ़ो अन्दर की आवाज़ सुनकर
अब कोई रोक सकता नही तुम्हे
करो अपने सपनो को साकार
तभी मिलेगा जीवन को सही आकार

Wednesday, July 13, 2011

फिर मुंबई, अगला कौन


वो सताते रहेंगे
और हम सहते रहेंगे
वो मारते रहेंगे
और हम मरते रहेंगे
वो कहते है हम जेहादी है
तो क्या हुआ
हम उन्हें भी अपनाते रहेंगे
अभी तो अफज़ल और कसाब ही है
तो क्या हुआ
और भी होंगे तो
उन्हें भी गोद में सुलाते रहेंगे
आज मुंबई है
कल दिल्ली, कोलकाता, बंगलोर होंगे
तो क्या हुआ
इनका भी दर्द आसानी से उठाते रहेंगे
हम अहिंसा के पुजारी थे , हैं और रहेंगे
तो क्या हुआ
अगर कुछ लोग मरे
हम उन्हें कुछ दिन याद कर जल्द ही भुलाते रहेंगे
वो सताते रहेंगे
और हम सहते रहेंगे
वो मारते रहेंगे
और हम मरते रहेंगे

Friday, May 27, 2011

बचपन की यादें

बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
दादी नानी की कहानियां
और बगीचे में शैतानियाँ
रूठ जाओ तो मिलता माँ का प्यार
और चाचा चाची का दुलार
वो कन्चे की गोलियां
और दोस्तों की टोलियाँ
न खाने की चिंता
न जिन्दगी से गम
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
बहुत याद आते है वो पल
जो लौट के कभी न आयेंगें कल
वो नदियों - तालाबों में कूद- कूद कर नहाना
आज भी याद है माली चाचा के बगीचे से आम चुराना
और फिर बाबूजी की प्यारी डांट फटकार
हमे दिखाती सही रास्ता हरबार
पर क्या करें ये हादसा होता लगातार
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है
नींद न आने पे माँ की थपकियाँ
और स्कूल में आँखों में झपकियाँ
हर खेल में दोस्तों का साथ
न हमे था जितना था
न देनी थी किसी को मात
हमे तो चाहिए थी दुनिया की हर ख़ुशी
और बस अपनों का साथ
शायद वो दिन लौट ना पाएंगे
फिर भी हम यही गायेंगे
बचपन की यादें
ह्सांती है गुदगुदाती है
यादें जो आँखें भर जाती है

Friday, April 29, 2011

वो याद आती है बहुत

वो याद आती है बहुत
जब हम अकेले होते हैं
वो ख्यालों में छा जाती है
जब हम अकेले होते हैं
पवन का झोंका ले आई ये खुसबू कैसी
लगता है ऐसा वो हो मेरे सामने बैठी
उनके इस एहसास से चेहरे पे मुस्कराहट आई
रात के सन्नाटे में जैसे जुगनू की रौशनी छाई
वो याद आती है बहुत
जब हम अकेले होते हैं
वो ख्यालों में छा जाती है
जब हम अकेले होते हैं
सुबह होती है शाम आती है
दिन कटता है रात भी जाती है
पर यादों का ताना बना है इतना प्यारा
जो हमे हरपल देता सहारा
उनकी आँखों की वो चमक
उनके लबों की वो हंसी
आज भी ये यादें उनकी देती है ख़ुशी
वो याद आती है बहुत
जब हम अकेले होते हैं
वो ख्यालों में छा जाती है
जब हम अकेले होते हैं