Sunday, March 29, 2015

हमें मुहब्बत उनसे है...

उन्हें पता है, पता नही
की हमें मुहब्बत उनसे है
की हमें मुहब्बत उनसे है ।

बातें होती ढेर सारी सी,
 यहां - वहां की, खूब सारी सी,
व्हाट्सप्प से हो या फेसबुक से हो
स्माइली हो या हाईक स्टीकर हो,
पर अब तक उसे यह केह नही पाया
की हमें मुहब्बत उनसे है
की हमें मुहब्बत उनसे है ।

बातें होंगी तो झगड़ा  भी है ,
रिवेंज भी है रगड़ा भी है
आंसू भी है पर मुस्कान बहुत है
और बातों का अम्बार बहुत है 
पर अब तक उसे यह केह नही पाया
की हमें मुहब्बत उनसे है
की हमें मुहब्बत उनसे है ।

गुड मॉर्निग, गुड इवनिंग की पूछो मत,
सुबह यहीं से शाम यहीं तक
how are you, How's the day,
लंच किया, डिनर किया,
अब तो ये संस्कार से है,
पर अब तक उसे यह केह नही पाया
की हमें मुहब्बत उनसे है
की हमें मुहब्बत उनसे है ।

Thursday, November 6, 2014

मत करो किसी से इतनी मुहब्बत

मत करो किसी से इतनी मुहब्बत कि
टूटे तो आह भी निकल न सके
दर्द हो सीने में इस कदर की
सांस भी सलीके से न चल सके
पलकों का झरने रुक से जाते हैं
आँखों की झील जो सुख जाते हैं
रास्ते बहुत ही बोझिल हो चले है
चंद कदम भी अब मीलों, लगने लगे है
तसव्वुर हमारा उन्हें गंवारा नही
लगता है अब हम उन्हें प्यारे नही

Friday, October 17, 2014

फेसबुक की ये गलियां

रात के अंधेरे में
मद्धिम सी रौशनी
कंप्यूटर पे चलते हाथ
हरी बतियाँ
जलती और बुझती
कुछ बीते समय को बताती
फेसबुक की ये गलियां
कुछ नए लोगों से मिलाती
कुछ पुराने दोस्तों से मिलवाती
कुछ नए रिश्ते बनवाती
कुछ पुराने रिश्तों को और मजबूत बनाती
कुछ नए राह दिखाती
कहीं रिश्तों में गरमाहट लाती
कहीं रिश्तों में कड़वाहट भी जागती
फेसबुक की ये गलियां। …

Sunday, August 3, 2014

वो... हमारे दोस्त !!!

रूठता है वो, मनाता हूँ मै
रूठता हूँ मै, मनाता वो है
लंच भी छीन कर खाता वो है
घर से आई हर चीज की वाट लगता वो है
मेरी हर एक पसंद को भाभी बुलाता वो है
बात बात पे उससे शादी का साहस दिलाता वो है
हर छोटी सी ख़ुशी पे पार्टी की ज़िद लगाता वो है
दोस्ती की दुहाई देके जेब खाली करवाता वो है
हर बात पे बियर की जुगत लगता वो है
हर मुश्किल साथ खड़ा नज़र आता वो है
मेरी हर परेशानी अपनाता वो है
और रुलाएगा क्या केह कर मुस्कुराता वो है
ये वो बहुत याद आते है
ये वो हैं जो हमारे दोस्त कहलाते है

happy friendship Day
After a long time i wrote something
Thanks friends its due to you...  

Friday, September 6, 2013

सीधे रस्ते

सीधे रस्ते भी नही होते है आसान
जब दूर देखो तो दीखता धुंधला आसमान
टेढ़े मेढ़े रास्तों की अलग  ही है कहानी
बात पत्ते की बस ये है भाई
गर चले उसपर तो हर रह है आसान ।